Monday, September 26, 2022
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देशहित से ऊपर विचारधारा को ठीक नहीं मानते

पीएम मोदी ने जेएनयू कैंपस में (जेएनयू कैंपस) गुरुवार शाम क्लास तरीके से स्वामी विवेकानंद की मूर्ति का उद्घाटन किया।

पीएम मोदी ने जेएनयू कैंपस में (जेएनयू कैंपस) गुरुवार शाम क्लास तरीके से स्वामी विवेकानंद की मूर्ति का उद्घाटन किया। जैसे ही बड़े-बड़े स्क्रीन्स पर पीएम मोदी दिखाई पड़े, वहां ‘जय श्री राम’ के नारे गूंजने लगे। वामपंथ का गढ़ कहे जाने वाले जेएनयू कैंपस में पीएम मोदी ने विचारधारा पर लंबा चौड़ा भाषण दिया। गौरतलब है कि जेएनयू में विचारधारा की लड़ाई हमेशा होती है और यह विश्वविद्यालय सुर्खियों में रहता है।

राष्ट्रहित से बड़ी विचारधारा नहीं
पीएम मोदी ने जेएनयू कैंपस के छात्रों से कहा कि आज तक आपके आइडिया की, डिबेट और डिस्कशन की जो भूख साबरमती ढाबा में मिटती थी। अब आपके लिए स्वामी जी की इस प्रतिमा की छत्रछाया में एक और जगह मिल गई है।

पीएम मोदी ने कहा कि कोई भी बात, जो हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है- वह राष्ट्रहित से ज्यादा प्राथमिकता अपने विचारधारा को देना है। क्योंकि मेरे विचारधारा ये कहती है, इसलिए देशहित के मामलों में भी मैं इसी सांचे में सोचूंगा, इसी दायरे में काम करूंगा, ये गलत है।जब बात राष्ट्र की हो तो साथ आओ
वामपंथ की नर्सरी में पीएम मोदी ने कहा आज हर कोई अपना विचारधारा पर सहमत करता है। ये स्वाभाविक रूप से भी है। लेकिन फिर भी, हमारे विचारधारा राष्ट्रहित के विषयों में, राष्ट्र के साथ नजर आनी चाहिए, राष्ट्र के खिलाफ नहीं।

उन्होंने कहा कि आप देश के इतिहास में देखिए, जब-जब देश के सामने कोई कठिन समय आया है, हर विचार हर विचारधारा के लोग राष्ट्रहित में एक साथ आए हैं। आज़ादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के नेतृत्व में हर विचारधारा के लोग एक साथ आए थे। उन्होंने देश के लिए एक साथ संघर्ष किया था।

शिशु में सभी विचारधारा एक साथ
पीएम मोदी सरकार को याद करते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान भी देश ने यही एकजुटता देखी थी। आपातकाल के खिलाफ उस आंदोलन में कांग्रेस के पूर्व नेता और कार्यकर्ता भी थे। आरएसएस के स्वयंसेवक और जनसंघ के लोग भी थे।

समाजवादी लोग भी थे। कम्यूनिस्ट भी थे पीएम मोदी ने कहा कि यह एकजुटता में, इस लड़ाई में भी किसी को अपनी विचारधारा से समझौता नहीं करना पड़ा था। बस उद्देश्य एक ही था- राष्ट्रहित। इसलिए साथियों, जब राष्ट्र की एकता अखंडता और राष्ट्रहित का प्रश्न हो तो अपने विचारधारा के अति तले दबकर निर्णय लेने से, देश का नुकसान ही होता है।

जेएनयू और टुकड़ों-टुकड़ों का नाता
इसी तरह जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी देश की टॉप यूनिवर्सिटी में से एक है। लेकिन हमेशा से ये सुर्खियों में भी रहता है। दिल्ली पुलिस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2016 में जेएनयू के छात्रों ने देश विरोधी नारे लगाये थे। ये छात्र किसी गैंग या ग्रुप का हिस्सा नहीं थे, सरकार या किसी एजेंसी के पास भी इससे जुड़ा कोई रिकॉर्ड नहीं है।

वर्ष 2016 की घटना के बाद टुकड़ों टुकड़े गैंग का इस्तेमाल जेएनयू के आंदोलनकारी छात्रों के लिए किया जाता है। अब बीजेपी और उनके सहयोगी अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए भी टुकड़े टुकड़े गैंग का इस्तेमाल करने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह कई चुनावी सभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित तमाम विपक्षी नेताओं के लिए टुकड़ों टुकड़े गैंग शब्द का इस्तेमाल करते हैं। पिछले महीने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि दिल्ली में हुई हिंसा के लिए टुकड़े टुकड़े गैंग जिम्मेदार है।