Tuesday, July 5, 2022
Home POLITICS लद्दाख में गतिरोध पर रूस ने जताई चिंता, कहा- भारत-चीन के बीच...

लद्दाख में गतिरोध पर रूस ने जताई चिंता, कहा- भारत-चीन के बीच तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी

रूस ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक उथल-पुथल और अनिश्चितता के बीच अगर भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव और बढ़ता है |

रूस ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक उथल-पुथल और अनिश्चितता के बीच अगर भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव और बढ़ता है तो पूरे यूरेशिया क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ेगी। इस तनानी का दुरुपयोग अन्य सक्रिय ताकतें अपने भू-राजनीतिक उद्देश्य के लिए कर सकती हैं।

ऑफलाइन मीडिया ब्रीफिंग में रूस के उप मिशन प्रमुख रोमन बाबुश्किन ने कहा कि उनका देश स्वाभाविक रूप से एशिया की दो ताकतों के बीच तनाव से चिंतित है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सकारात्मक वार्ता बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, हाल में दोनों पक्षों द्वारा संयम बरतने और तनाव को राजनयिक और सैन्य माध्यमों से बातचीत के जरिये हल करने के बारे में एन्क्रिप्शन की खबर का स्वागत योग्य कदम है।

उल्लेखनीय है कि पूर्वी लद्दाख में सीमा पर भारत और चीन के बीच गत छह महीने से गतिरोध बना हुआ है और अब दोनों पक्ष ऊंचाई वाले क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे हटाने के प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं।

वैश्विक और जिम्मेदार पड़ोसी ताकत
रूसी राजनयिक बाबुश्किन ने कहा, रूस की विशेष स्थिति है क्योंकि उसके विशेष रणनीतिक संबंध भारत और चीन दोनों के साथ हैं और स्वतंत्र रूप से हैं। हम स्वमित रूप से भारत और चीन के बीच तनाव से चिंतित हैं। हालांकि, हमारा मानना ​​है कि आज नहीं तो कल इसका समाधान होगा। वैश्विक और जिम्मेदार पड़ोसी ताकतें हैं।

भारत-अमेरिका के संबंधों से समस्या नहीं
रूसी राजदूत ने कहा कि अमेरिका के साथ भारत के बढ़ते संबंधों से उसे कोई समस्या नहीं है। भारत वैश्विक ताकत है और उसके अपने हित हैं। उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि रूस से रक्षा सौदों को लेकर भारत पर प्रतिबंध जैसे अनुचित दबाव बनाने की कोशिश की गई। गौरतलब है कि रूस एस -400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने का समझौता किया गया था, जिस पर ट्रम्प प्रशासन ने प्रतिबंध लगाने तक चेतावनी दी थी।

एससीओ और ब्रिक्स अपना काम कर रहे हैं
भारत और चीन के शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक्स का सदस्य होने का संदर्भ देते हुए बाबुश्किन ने कहा कि जब बहुपक्षीय मंच पर सहयोग की बात आती है तो सम्मानजनक संवाद ही प्रमुख हथियारों का होता है। जब एससीओ और ब्रिक्स की बात आती है तो दोनों संगठनों ने सहयोग के लिए क्षेत्रवार दर्जनों व्यवस्था विकसित की है और मैं आपको को भरोसा देता हूं कि उनके प्रासंगिक हित बढ़ रहे हैं।