Tuesday, September 20, 2022
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वर्चस्व की लड़ाई में अशांत कांगड़ा भाजपा, नहीं रास आ रहे पैराशूटी नेता, कामों में अड़ंगा, आपसी रार सरेआम

वर्चस्व को लेकर ज्वालामुखी से उठी आग की चिंगारी भले ही कुछ शांत हुई हो पर कांगड़ा भाजपा में अभी भी कुछ ठीक नहीं चल रहा है

भाजपा भले ही अपने नेताओं व कार्यकर्त्ताओं को  एकजुटता का पाठ पढ़ा कर आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है ,पर हालात कुछ खराब भी बनते जा रहे हैं। वर्चस्व को लेकर ज्वालामुखी से उठी आग की चिंगारी भले ही कुछ शांत हुई हो, पर कांगड़ा भाजपा में अभी भी कुछ ठीक नहीं चल रहा है जो कि पार्टी हित में नहीं है। यहां पर कुछ समय पहले भी आपसी वर्चस्व को लेकर जंग छिड़ी थी जब एक नेता को भाजपा में आने कि हरी झंडी मिली थी। उस समय कोई भी विरोध तो नहीं कर पाया लेकिन अंदर ही अंदर कहीं गुब्बार तो  भाजपा के नेताओं में रहा जिन्होंने वर्षों पार्टी को दे दिए। लेकिन अब हालात और भी बिगडते जा रहे हैं । कारण इसके पीछे भाजपा के वरिष्ठ व कनिष्ठ नेताओं व कार्यकर्त्ताओं की अनदेखी को लेकर भी है। चाहे विकास के मामले हो या फिर अधिकारियों के तबादले इनमें वरिष्ठ नेताओं को अनसुना किया जाना अब इन्हें रास नहीं आ रहा है। विकास व तबादलों में कांगड़ा में एक ही गुट की चल रही चाल से भाजपा का दूसरा गुट नाखुश भी है, क्योंकि उनकी कोई भी सुनवाई सरकार के पास नहीं है। इन्हीं कुछ बातों को लेकर जो गुब्बार युवा व वरिष्ठ नेताओं के दिलों में था वह अब जग जाहिर हो गया है। वीरवार को कांगड़ा भाजपा मंडल की बैठक में इन्हीं बातों को भाजपा के कार्यकर्त्ताओं ने उजागर भी कर डाला और जमकर अपनी भडा़स भी निकाली। बैठक तो पार्टी को मजबूती प्रदान करने को लेकर थी, लेकिन यहां पर आलम कुछ ओर ही रहा। कार्यकर्त्ताओं में आपसी बहसबाजी भी हुई तो आरोप- प्रत्यारोप भी एक दूसरे पर लगे। हालांकि बैठक में हुए हंगामे को लेकर स्पष्ट रूप से तो कोई नहीं बोला पर आपसी मतभेद जरूर सामने आए। कांगड़ा भाजपा में इस वक्त की राजनीति को देखें तो यहां पर कई नेता टिकट की चाहत कर रहे हैं और उनमें आपसी मतभेद भी कहीं न कहीं है जिसका खामियाजा भी कांगड़ा विधानसभा के चुनावों में भुगत चुकी है।खैर कांगड़ा भाजपा मंडल की बैठक में उठे बवाल को शांत करने का प्रयास तो किया गया है लेकिन अगर हालात ऐसे ही रहे तो यह पार्टी  हित में नहीं है जिसका खामियाजा भी पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।